जानिए क्यों भगवान शिव ने क्रोध में ब्रह्मा जी का पांचवा सिर काट दिया था ?
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मित्रों इस ब्रह्मांड की रचना ब्रह्मा जी ने महादेव के मार्गदर्शन से की थी। एक कथा के अनुसार एक बार ब्रह्मा जी सतरूपा नामक कन्या की रचना की। किन्तु अपने ही द्वारा की गयी रचना को देखकर ब्रह्मा जी सतरूपा में मोहित हो गए। सतरूपा ने ब्रह्मा जी से कहा कि आपने मेरी रचना की है इसलिए आप मेरे पिता तुल्य है इसलिए मैं आपसे विवाह नही कर सकती। किन्तु ब्रह्मा की तरह से उसे प्राप्त करना चाहते थे।
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इस कारण सतरूपा सभी दिशाओं में छुपने का प्रयास करने लगी किन्तु कहीं भी उसे सफलता नही मिली। ब्रह्मा जी ने सतरूपा की निगरानी के लिए एक अतिरिक्त सिर को उत्पन्न कर लिया। ब्रह्मा जी का यह सिर किसी असुर की तरह व्यवहार कर रहा था। जिस समय ब्रह्मा जी ने सतरूपा से विवाह किया भोलेनाथ अत्यंत क्रोधित ही गए।
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भगवान शिव वहां पर प्रकट हुए और उन्होंने ब्रह्मा जी के पांचवे सिर काट दिया। यह देखकर सतरूपा असहज हो गयी। भोलेनाथ ने ब्रह्मा जी से कहा कि आपने अपनी ही पुत्री से जबरन विवाह करके अपनी प्रतिष्ठा को कलंकित किया है। इसलिए आज से आपकी कोई पूजा नही करेगा। कहा जाता है इसके बाद ब्रह्मा जी ने चारों वेदों की रचना की थी। अगर आपको हमारी यह पोस्ट पसन्द आयी हो तो शेयर और फॉलो करना न भूलें। ॐ नमः शिवाय।



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