व्यापार रोकना PAK को ही पड़ेगा भारी, जानें किसपर कितना होगा असर

व्यापार रोकना PAK को ही पड़ेगा भारी, जानें किसपर कितना होगा असर
पाकिस्तान ने भारत के साथ व्यापारिक रिश्ते खत्म किए
जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 के तहत मिले स्पेशल स्टेटस का दर्जा हटा दिया गया है. इसे लेकर भारत से ज्यादा पाकिस्तान में बौखलाहट है. पाक इस कदर नाराज है कि उसने भारत से राजनयिक संबंधों में न सिर्फ कमी कर दी बल्कि द्विपक्षीय व्यापार पर रोक लगा दी है. हालांकि पाकिस्तान का यह फैसला सेल्फ गोल जैसा है क्योंकि इससे सबसे ज्यादा असर उसके अपने नागरिकों पर पड़ेगा, जबकि भारत को थोड़ा आर्थिक नुकसान होगा.
अनुच्छेद 370 पर जम्मू-कश्मीर से ज्यादा गुस्सा पाकिस्तान में देखा जा रहा है. प्रधानमंत्री इमरान खान की अगुवाई में राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (NSC) की बैठक के बाद पाकिस्तान ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार पर रोक लगा दी, साथ ही भारत से सभी व्यापारिक रिश्ते भी तोड़ लिए हैं. पाकिस्तान ने यह भी कहा है कि अब भारत के साथ द्विपक्षीय समझौतों की समीक्षा करेगा.
171 अरब से ज्यादा का व्यापार
भारत पाकिस्तान के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 2017-18 में 2.41 अरब डॉलर (1,71,46,54,75,000 रुपये) रहा, जबकि 2016-17 में 2.27 अरब डॉलर का व्यापार हुआ. इस दौरान भारत ने 2017-18 में 31.5 अरब का सामान का आयात पाकिस्तान से किया, जबकि 124 अरब रुपये का सामान निर्यात किया गया. इसी तरह भारत ने 2018-19 में पाकिस्तान को 144.3 अरब रुपये (तत्कालीन कीमत) की कीमत का सामान निर्यात किया तो 34.8 अरब रुपये (तत्कालीन कीमत) की कीमत का सामान आयात किया.
तनाव के बीच व्यापार में बढ़ोतरी
कश्मीर मामले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने की धमकी देने वाले पाकिस्तान के साथ भारत के व्यापार पर नजर डालें तो स्थिति साफ होती है कि व्यापार के मामले में पाकिस्तान भारत के आगे कहीं नहीं ठहरता है. 2017 में भारत जहां दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश था वहीं 2018-19 में जीडीपी के आधार पर पाकिस्तान 39वें पायदान पर था. हालांकि 2019 में भारत की अर्थव्यवस्था में गिरावट आई और वह पांचवें से सातवें स्थान पर खिसक गया.
14 फरवरी को पुलवामा में आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के राजनीतिक और व्यापारिक रिश्तों में आई खटास से पहले के 9 महीने (जुलाई 2018 से जनवरी 2019) के द्विपक्षीय व्यापार पर नजर डाली जाए तो दोनों देशों के बीच व्यापार 1.122 बिलियन डॉलर बढ़ गया था जिसमें पिछले साल इसी अवधि की तुलना में 4.96 फीसदी यानी 1.069 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी देखी गई.
भारत का निर्यात ज्यादा
2018-19 में वित्तीय वर्ष के शुरुआती 7 महीने (जुलाई 2018 से जनवरी 2019) के आंकड़े बताते हैं कि भारत ने कुल द्विपक्षीय व्यापार का 79.33 फीसदी हिस्सा निर्यात किया.
जुलाई 2018 से जनवरी 2019 के बीच पाकिस्तान का भारत से आयात बढ़ गया. इस दौरान 890.05 मिलियन डॉलर तक आयात किया गया जबकि इसी अवधि में पिछले वित्तीय वर्ष (2017-18) में 871.71 मिलियन डॉलर का आयात हुआ और इसमें 2.11 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
दोनों देशों के बीच व्यापार से जुड़े आंकड़ों के अनुसार अन्य देशों की तुलना में पाकिस्तान का भारत के साथ आयात लगातार बढ़ता जा रहा है और यह उसके लिए नकारात्मक बढ़ोतरी है.
2017-18 भारत ने पाकिस्तान को 1.84 बिलियन डॉलर (1,30,98,40,80,000 रुपये (वर्तमान)) का सामान निर्यात किया जबकि 2016-17 में यह निर्यात 1.64 बिलियन डॉलर का रहा. इस तरह से इन दो वित्तीय वर्षों में 12.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
ट्रेंडिंग इकोनॉमिक्स डॉट कॉम ने COMTRADE डेटाबेस के आधार पर बताया कि 2017 में पाकिस्तान ने भारत को 334.75 मिलियन डॉलर (23,82,08,10,000 रुपये) का निर्यात किया. 2016 की तुलना में 2017 में गिरावट देखी गई. 2008 से लेकर अब तक के 11 सालों में 2013 का साल पाकिस्तान के लिए अच्छा रहा.
भारत पाकिस्‍तान से प्रमुख तौर पर ताजे फल, सीमेंट, बड़े पैमाने पर खनिज एवं अयस्क, प्रसंस्कृत खाद्य, अकार्बनिक रसायन, तैयार चमड़ा, कच्चा कपास, मसाले, ऊन, रबड़ उत्पाद, अल्कोहल पेय, मेडिकल उपकरण, समुद्री सामान, प्लास्टिक और खेल का सामान आयात करता है. वहीं पाकिस्तान भारत से चीनी, चाय, ऑयल केक, पेट्रोलियम ऑयल, कच्चा कपास, सूती धागे, टायर, रबड, डाई, रसायन समेत कई प्रमुख वस्‍तुओं का आयात करता है.
2017 में पाकिस्तान ने भारत को सबसे ज्यादा ताजे फल, बादाम, अंजीर आदि का 89.62 मिलियन डॉलर का निर्यात किया. इसके बाद नमक, सल्फर, पत्थर, प्लास्टर, नींबू और सीमेंट का 87.19 मिलियन डॉलर का निर्यात किया.
पाकिस्तान में बढ़ेगी महंगाई
पाकिस्तान की ओर से द्विपक्षीय व्यापार पर रोक लगाने के फैसले से भारत को आर्थिक तौर पर कुछ नुकसान हो सकता है लेकिन ज्यादा असर पाकिस्तान पर पड़ेगा. वर्ल्ड बैंक का कहना है कि अगर दोनों देशों के बीच तनाव खत्म हो जाए तो द्विपक्षीय व्यापार 2 बिलियन डॉलर से 35 बिलियन डॉलर तक बढ़ सकता है.
पिछले साल वर्ल्ड बैंक की ओर से की गई स्टडी 'ए ग्लास हाफ फुल, द प्रोमिस ऑफ रिजनल ट्रेड इन साउथ एशिया' ने अपने अध्ययन में पाया कि सीमा पर फलों और सब्जियों की आवाजाही पर पाबंदी से भारतीय किसानों को अपने उत्पाद सस्ते में बेचना पड़ता है जबकि पाकिस्तान में माल नहीं पहुंचने पर यही चीज काफी महंगी हो जाती है. खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है.
इसका उदाहरण इससे लिया जा सकता है कि 2017 में पाकिस्तान में टमाटर के दाम 300 रुपये किलो तक पहुंच गए थे जबकि सीमापार अमृतसर में उस समय टमाटर 20 से 30 रुपये किलो बिक रहे थे. यही हाल प्याज का भी होगा क्योंकि टमाटर की तरह प्याज भी मौसमी कारणों से पाकिस्तान में उगाया नहीं जाता और वह पूरी तरह से भारत से आयात पर निर्भर रहता है.
पाकिस्तान की ओर से व्यापारिक रिश्ते तोड़ने से भारत को कुछ आर्थिक नुकसान हो सकता है लेकिन ज्यादा असर उसके नागरिकों को ही होगा. पाक के लोगों को फलों और सब्जियों के लिए भारत पर निर्भर रहना पड़ता है, ऐसे में जब समय पर सामान नहीं पहुंचेगा, साथ ही किसी और देश से सामान मंगाया तो उसकी ढुलाई से लागत कई गुना बढ़ जाएगी. तो वहां पर महंगाई बढ़ेगी और जन-जीवन बहुत ज्यादा प्रभावित हो जाएगा.

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